मेरी पहली नौकरी 

April 22, 2022

4 साल पहले मेरी बचपन की दोस्त ने मुझे बताया कि अग्रसर एम्पोलाइबिलिटी सेंटर में कंप्यूटर और इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स चलाए जाते हैं और वहाँ के स्टूडेंट्स को नौकरी भी मिल जाती है।तीन महीने बाद, मैंने कोर्स पूरा कर लिया।

अग्रसर सेंटर पर कंप्यूटर ट्रैनिंग के दौरान मुझे शिखा मैम मिली।उन्होंने मुझे इस्लामपुर अग्रसर बचपन सेंटर पर 15 दिनों  के लिए बच्चो को पढ़ाने के लिए कहा।जब मै इस्लामपुर गई, वहाँ मेरा इंटरव्यू प्रीती पांडेय मैम ने लिया।इस्लामपुर टीम ने मुझे वहाँ के बच्चो के बारे में बताया कि हम 5 से 14 साल तक के बच्चो को पढ़ाते है।वहाँ बच्चो के तीन लेवल बनाए हुए थे लेवल A,B,C और मुझे लेवल A को पढ़ाने के लिए कहा गया।बच्चो का करिकुलम दिखाया और बताया गया इस तरह से डेली क्लास में पढ़ाना है।यह 4 साल पुरानी बात है मुझे आज भी याद है, करिकुलम दिखाने के बाद उन्होंने मुझे अगले दिन की प्लानिंग करने को कहा। मैंने P लेटर का इंट्रो कराया; व्हाइटबोर्ड पर पैरेट, पिज़्ज़ा, पापाया की ड्राइंग बनाई और बच्चो से उनके नाम बोलने को कहा।बच्चो को P लेटर के फ़्लैश कार्ड्स और रियल ओब्जेक्टे दिखाए और बच्चो को वर्कशीट कराई, फोनिक्स कराया।

तभी इस्लामपुर टीचर को मेरी क्लास अच्छी लगी और उन्होंने मुझे सिकंदरपुर में टीचर की वैकेंसी के बारे में बताया की क्या आप सिकंदरपुर में जॉब करोगे ? जब मैंने अग्रसर में टीचर के लिए जॉब ज्वाइन की करिकुलम होने की वजह से बच्चो को पढ़ाने में मज़ा आया और मेरी भी लर्निंग हुई।जब मैने अपनी 12वीं  क्लास की पढाई पूरी की तभी मैनें एक बुक में NGO के बारे में पढ़ा था और जब मैंने अग्रसर में टीचर के लिए जॉब ज्वाइन की तब मैंने जाना की NGO क्या होता है और वह किस तरह से काम करता है।

सिकंदरपुर सेंटर मेरे घर से 12 किलोमीटर की दूरी पर है।सिकंदरपुर में टीचिंग से पहले मैं कभी इतनी दूर नहीं गई थी।जोइनिंग के दिन पहली बार इस सेंटर पर आ रही थी, घर से भी मेरे साथ कोई नहीं आया था इसलिए मैं उस दिन सेंटर नहीं ढूँढ पायी ! फिर अगले दिन मुझे सिकंदरपुर की टीचर मिली, उनके साथ मैं कुछ दिन NGO आती थी तब जाकर मुझे घर से बाहर आने जाने का कॉन्फिडेंस आ गया और मुझे सब रस्ते याद हो गए।अब मैं आसानी से किसी भी जगह अकेले आ जा सकती हूँ !

मैंने कंप्यूटर सीखा हुआ था लेकिन अग्रसर ज्वाइन करने से भी मेरी कंप्यूटर नॉलेज बढ़ी।अब मैं खुद से आधार कार्ड पेन कार्ड डाउनलोड कर लेती हूँ।अब मैं खुद की पढाई के लिए ऑनलाइन अड्मिशन फॉर्म, दिल्ली यूनिवर्सिटी की वेबसाइट से अपनी कॉलेज का स्टडी मटेरियल, किसी भी क्लास का रिजल्ट, ईमेल आईडी आदि क्रिएट कर लेती हूँ।

यह जॉब करने से मैंने ड्राइंग में बहुत कुछ सीखा।ड्राइंग से यह बेनिफिट है कि छोटे बच्चो को व्हाइटबोर्ड पर पिक्चर ड्रा करके पिक्चर पहचानना सिखाया जाता है।अब में कोई भी ऑब्जेक्ट आसानी से बोर्ड पर मिनटों में बना लेती हूँ।मैंने खुद से आर्ट एंड क्रॉफ्ट सीखकर बच्चो के साथ भी सेशन लिये। 

लॉकडाउन में बच्चो की पढाई के लिए वीडियो बनाना, कालिंग करना और माता-पिता से बातचीत करना की  लॉकडाउन में किन-किन परेशानी का सामना कर रहे है बच्चो की ऑनलाइन क्लास से जुड़ने में - यह सब सीखा।घर रहकर वर्क फ्रॉम होम करना भी नया एक्सपीरियंस रहा !

मैंने हर एक दिन कुछ न कुछ सीखा है ! अग्रसर की टीम और ऑफिस का सभी स्टाफ बहुत कोऑप्रेटिव है।यह सिर्फ मैंने अपनी अग्रसर की पहली जॉब से सीखा।

Simran

simran@agrasar.org