सुकन्या समृद्धि योजना और उसकी विशेषताएं  

May 9, 2022

सुकन्या समृद्धि योजना भारत सरकार द्वारा बेटियों के लिए 2014 में शुरू की गई थी। इस योजना में 0 से लेकर 10 साल तक की बेटियों का खाता खोला जाता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बेटियों के कल्याण को बढ़ावा देना और उनकी वित्तीय दिक्कतो को दूर करना है। इस कल्याणकारी योजना के जरिये बेटियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाता है। 

इस योजना में खाता खुलवाने के लिए न्यूनतम 250 रुपये लगते हैं। सुकन्या खाता खुलवाने के बाद एक वर्ष में न्यूनतम 250 और अधिकतम 1.5 लाख तक की राशि जमा की जा सकती है। इस योजना में वर्तमान ब्याजदर 7.6% है, जोकि दूसरे बैंको से अधिक है। जमा राशि और ब्याज पर कोई भी कर अथवा टैक्स नहीं लगता है। 

सुकन्या समृद्धि योजना में सबसे अच्छी बात यह है कि बेटी के खाते से पैसे  माता-पिता नहीं निकाल सकते है। जब आप की बेटी 18 साल की हो जाएगी तो आप  “50 %" जमा राशि निकाल सकते है। लेकिन सरकार के नियम अनुसार - प्रमाण देना होगा कि आप केवल शादी या उच्च शिक्षा के लिए ही पैसे निकाल रहे हैं।

इस योजना के प्रति माता-पिता की जागरूकता बढ़ाने के लिए अग्रसर संस्था द्वारा समुदाय में जागरूकता कार्यक्रमो का आयोजन किया जाता है।और परिणामस्वरूप 2021 से लेकर अभी तक हम “161 सुकन्या खाते” खुलवाने मे सफल हुए है। अभी तक जिन लोगो ने अपनी बेटियों का खाता खुलवाया है वो बहुत खुश है इस स्कीम के बारे में जानकर क्योकि जो पैसे वो जमा कर रहे है उनकी बेटियों के भविष्य में काम आएंगे। 

जिन माता-पिता ने बेटियों के खाते खुलवाए है उनसे अग्रसर की टीम लगातार संपर्क में रह रही है और जरुरत पड़ने पर उचित जानकारी भी प्रदान की जा रही है। इस योजना में सभी माता-पिता समय-समय पर बचत खाते में पैसे जमा कर रहे है ताकि बेटियों को भविष्य में जरुरत पड़ने पर अच्छी शिक्षा दी जा सके और बिना किसी वित्तीय दिक्कतो के उनकी शादी की जा सके। 

समुदाय में बात करके और पिछले अनुभव से पता चला है की सुकन्या समृद्धि योजना के प्रति महिलाएं ज्यादा जागरूक है। उनका मानना है कि यदि वो शिक्षा से वंचित रह गयी पैसों या फिर परिवारिक समस्या के कारण लेकिन अपनी बेटियों का भविष्य सुनिश्चित करना है। इसी वजह से वो अपनी बेटियों का सुकन्या समृद्धि योजना में खाता खुलवा कर थोड़ा-थोड़ा पैसे बचत करके अपनी बेटियों का भविष्य सुरक्षित करना चाहती हैं। जिससे उनकी पढाई या शादी में वित्तीय दिक्कत न हो।  

Aruna

aruna.devi@agrasar.org